हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से अवशेष प्रबंधन को लेकर एक जिला स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया।

कृषि पानीपत विशेष स्टोरी सामाजिक

पानीपत, 6 सितम्बर।

 

लघु सचिवालय के प्रथम तल सभागार में नाबार्ड और हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से कृषि अवशेष प्रबंधन को लेकर एक जिला स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने की। नाबार्ड द्वारा पूरे जिले के गांवों के लिए 30 कलस्टर आधारित फसल अवशेष प्रबंधन सम्बंधी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसके लिए जेबीएनआर ट्रस्ट को राज्य स्तरीय एजेंसी के रूप में नामित किया जाना हमारे लिए गर्व का विषय है। इस बैठक में कस्टम हायरिंग से सम्बंधित एक एप टीएससीएस कम्पनी के माध्यम से बनाने के बारे में भी चर्चा हुई। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त सुजान सिंह, एसडीएम विवेक चौधरी, कृषि उपनिदेशक पवन शर्मा, नाबार्ड के डीडीएम संजय कुमार, जेपीएनआर ट्रस्ट के विक्रम आहुजा ने भी इस विषय पर अपने अनेक सुझाव दिए।

बैठक को सम्बोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार ही नही किसानों और मजदूरों के रोजगार का माध्यम भी है। यदि कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को अपनाया जाए तो इसे प्रदूषण रहित लाभकारी कृषि भी बनाया जा सकता है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े सभी विभाग गांव-गांव जाकर लोगों को कृषि अवशेष को जलाने से होने वाले दुषपरिणामों के बारे में और अधिक जागरूक करें। यह जिलावासियों के सौभाग्य की बात है कि पानीपत जिला में सरकार की ओर से 50 सीएचसी केन्द्रों के माध्यम से जिला के 403 किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान पर कृषि अवशेष प्रबंधन के महंगे से महंगे उपकरण व मशीनें दिलवाई गई हैं। ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित किए गए हैं जो किसानों का हर प्रकार का सहयोग करेंगे ताकि धान की पराली को समय पर बेचा जा सके और आईओसी रिफाईनरी जैसे उद्योगों के माध्यम से एथनॉल बनाकर न केवल किसानों की आय बढाई जा सके बल्कि देश की बढ़ती इंधन की मांग को भी पूरा किया जा सके। इसलिए सभी पंचायती राज संस्थाएं, प्रगतिशील किसान, सीएससी केन्द्र प्रभारी और ग्रामीण विकास से जुड़े सभी अधिकारी इस योजना को सफल बनाने में अपना पूर्ण सहयोग दें।

उन्होंने कहा कि किसानों के कल्याण के लिए केन्द्र व हरियाणा सरकार ने अनेक कल्याणकारी योजनाएं लागू की है लेकिन जागरूकता के अभाव में ग्रामीण क्षेत्र के लोग इन योजनाओं का भरपूर लाभ नही उठा पाते। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि इस कार्यक्रम का शुभारम्भ पानीपत जिला से हुआ है लेकिन इस कार्यक्रम को सफल बनाना जिला प्रशासन के समक्ष एक चुनौती पूर्ण कार्य है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से जहां वायु प्रदूषण बढ़ता है वहीं भूमि की उर्वरा शक्ति बढाने वाले जीव जन्तु भी जल जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति का हृास होता है इसलिए किसान पराली को बेचकर एथनॉल बनाने में लोकतंत्र में जनता को जागरूक करके ही निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए किसानों को समझाएं कि वे पराली ना जलाएं-पराली से धन कमाएं।

उन्होंने कहा कि कृषि, कृषि विज्ञान केन्द्र, बागवानी विभाग के अलावा ऐसे सभी विभाग जो ग्रामीण विकास से सम्बंध रखते हैं। इस अभियान को सफल बनाने में पूर्ण सहयोग दें। विशेषकर सीएचसी केन्द्र प्रभारियों के समक्ष यह चुनौती पूर्ण कार्य है क्योंकि सीएचसी केन्द्र केन्द्र प्रभारियों ने अपने-अपने केन्द्रों पर काफी धनराशि भी खर्च की है। इसलिए सभी अधिकारी, कर्मचारी, किसान संगठन और सीएचसी केन्द्रों के सभी सदस्य एक समन्वयक के रूप में दी गई जिम्मेदारियों का उचित निर्वहन करें। इस अवसर पर सभी किसानों को किसान प्रगति कार्ड वितरित किए गए। इस बैठक में ग्रामीण विकास सम्बंधित विभागों के अधिकारियों, पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों, प्रगतिशील किसानों और सीएचसी प्रभारियों ने भाग लिया।


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सिटी तहलका डेस्क

 

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