आप्रेशन में देरी से बच्ची के पैर में हुआ फ्रेक्चर।। सिविल हाॅस्पिटल में फिर बरती गई लापरवाही 

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पानीपत विशेष स्टोरी

लगता है पानीपत का सिविल अस्पताल लापरवाही का केंद्र बन गया है। अस्पताल में एक हफ्ते पहले ही एसएनसीयू (सिक न्यूबाॅर्न केयर यूनिट) के फेल होने से जहां 2 बच्चों की मौत हो गई थी, वहीं 30 जून को डाॅक्टरों द्वारा आॅप्रेशन में देरी से एक बच्ची के पैर में फ्रेक्चर हो गया और बच्ची के दर्द से चिल्लाने के बाद भी उसे खानपुर मेडिकल कालेज में रेफर कर दिया गया। इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की लापरवाही जग जाहिर हो गई है। अब बच्ची के परिजन खानपुर के बाद चंडीगढ़ पीजीआई तक चक्कर काटने के बाद वापस पहुंच गए हैं। उन्होंने अस्पताल के डाॅक्टरों पर एंबुलेंस तक मुहैया न कराने और पूरी तरह लापरवाही का आरोप लगाया है। अब अस्पताल के सिविल सर्जन ने बच्ची को हड्डी रोग विशेषज्ञ को दिखाने का दावा किया है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पानीपत में दम तोड़ती नजर आ रही है। दंबग मंत्री होने के बावजूद प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का स्वास्थ विभाग लगातार अपनी लापरवाह कार्यप्रणाली के लिए चर्चा में रहता है। वो इसलिए क्योंकि आए दिन अस्पताल में कोई न कोई घटना ऐसी हो जाती है, जो वास्तव में सरकारी अस्पताल की छवि पर खुद-ब-खुद लापरवाही का ठप्पा लग जाता है। प्रमाण ये है कि सिविल अस्पताल में 25 जून की रात को एसएनसीयू (सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट) एसी पूरी तरह फेल गया था। इससे 2 नवजात बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार अस्पताल के डाॅक्टर और स्वास्थ्य विभाग को ठहराया गया था। क्योंकि अस्पताल में दो दिनों से बिजली की वोल्टेज कम-ज्यादा होने के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया था। आखिरकार 25 जून की रात को करीब 10 बजे के बाद एसएनसीयू एसी पूरी तरह फेल हो गया। इसका खामियाजा लोगों को अपने मासूम को खोकर भुगतना पड़ा।

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    सिविल अस्पताल लापरवाही का केंद्र बन गया है। अस्पताल में एक हफ्ते पहले ही एसएनसीयू (सिक न्यूबाॅर्न केयर यूनिट) के फेल होने से जहां 2 बच्चों की मौत हो गई थी
अब आॅप्रेशन में देरी से बच्ची के पैर में हुआ फ्रेक्चर 

अब अस्पताल की एक और लापवाही उजागर हुई है। बता दें कि 30 जून को फिर से डाॅक्टरों ने अस्पताल में डिलीवरी के लिए आई शेरा गांव की महिला पिंकी के आप्रेशन में देरी की गई। इसकी नतीजा ये हुआ कि महिला ने जिस बच्ची को जन्म दिया उसके पैर में ही फ्रेक्चर मिला। यह फ्रेक्चर क्यों हुआ इसका अस्पताल प्रशासन के पास भी जवाब नहीं है। इतना ही नहीं बच्ची के चिलाने के बाद भी डाॅक्टरों ने उसका यहां के किसी आॅर्थोपेक्सि से चैकअप कराना उचित नहीं समझा, बल्कि उसे इसी हालत में खानपुर मेडिकल कालेज में रेफर कर दिया गया। रोती-बिलखती मासूम बच्ची की मां पिंकी ने बताया की डॉक्टरों ने उन्हें इलाज के लिए खानपुर जाने के लिए एम्बुलेंस भी मुहैया नहीं करवाई। वे 5000 रुपये की एंबूलेस अपने खर्चे पर लेकर खानपुर से चंडीगढ़ पीजीआई पहुंचे, लेकिन हैरान की बात ये है कि वहां भी बच्ची को इलाज नहीं मिला। आखिरकार वे मंगलवार सुबह ही पीड़ित बच्ची को लेकर पानीपत के सामान्य अस्पताल पहुंच गए। लेकिन हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं पहुंचे। जब सिटी तहलका ने इस बारे में पानीपत के सिविल सर्जन संतलाल वर्मा से बात की तो उनका कहना था कि उन्होंने बच्ची का एक्सरे कर जांच की है। बच्ची के पैर की हड्डी में सामान्य से ज्यादा गैप है। स्पेशलिस्ट डॉक्टर से जांच करवाई जाएगी। जंहा भी इलाज संभव होगा करवाया जाएगा। सवाल ये उठता है कि इलाज तो देर-सवेर मिल जाएगा, लेकिन अगर बच्ची फिर भी चल-फिर नहीं सकी तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?


by
प्रदीप रेढ़ू
सिटी तहलका

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