बिजली निगम ने किया गरीबों के निशुल्क रोटी बैंक में अंधेरा

roti bank panipat
पानीपत विशेष स्टोरी सामाजिक

बिजली निगम ने फ्लाईओवर के नीचे बने निशुल्क रोटी बैंक की बिजली ही काट डाली। अब निगम इस रोटी बैंक में एक भी बल्व जलाने की इजाजत नहीं दे रहा है। इससे यहां के सेवादारों को रात के समय खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने परेशानी के चलते यहां एक बल्व लगाने के लिए अब डीसी से गुहार लगाई है।

बता दें कि पानीपत में कुछ महीने पहले समाजसेवी लोगों ने पहली बार गरीबों के लिए निशुल्क रोटी उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया था। इसमें किसी भी समय कोई भी जरूरतमंद आसानी से रोटी खा सकता है। इसे निशुल्क रोटी बैंक का नाम दिया गया था। कुछ दिन पहले उसे डीसी के आदेश पर किन्हीं कारणों से कुछ दूर आगे स्थानांतरित कर दिया गया था।

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सैकड़ों जरूरतमंद करते हैं बैंक में निशुल्क भोजन: रोटी बैंक के सेवादारों ने सिटी तहलका को बताया कि फ्लाईओवर के नीचे और बस अड्डे के सामने बनाए गए इस रोटी बैंक में प्रतिदिन सैकड़ों लोग नीचे बैठकर निशुल्क भोजन कर तृप्त होते हैं। इसके अलावा कोई भी भूखा व्यक्ति इस रोटी बैंक पहुंचकर भोजन कर सकता है। कुछ दिन पहले बिजली निगम ने यहां की बिजली कनेक्शन को ही हटा दिया। रोटी बैंक के सेवादारों का कहना है कि रोटी बैंक के रसोई घर और लोगों के रोटी खाने के स्थान पर बिजली न होने से अंधेरा रहता है। ऐसे में जहां सेवादारों को खाना बनाने में परेशानी होती है, वहीं भोजन करने वालों को भी अंधेरे में बैठकर ही भोजन करना पड़ता है। बिजली कट जाने से अब सेवादार बचे खाने को फ्रिज में भी नहीं रख सकते। गरमी के कारण वह भोजन खराब हो जाता है। जिससे उस भोजन को फेंकना पड़ता है। उनका कहना है यह तो समाजसेवा का कार्य है। उन्होंने पानीपत प्रसाशन से रोटी बैंक में बिजली मुहैया कराने की मांग की है।

शहर में दानवीर और समाजसेवी दो रोटी या अपनी इच्छानुसार कोई भी राशि जमा करवाकर इस बैंक में अपना खाता खुलवा सकते हैं। बैंक में जमा रोटियां गर्म सब्जी के साथ जरूरतमंदों को मुफ्त में दी जाती हैं। शहर के बस स्टैंड के सामने शुरू हुए इस बैंक की शुरुआत हिसार की समाजसेवी संस्था श्री बालाजी चैरिटेबल ट्रस्ट ने की है। इसकी संभाल देखरेख की जिम्मेदारी जींद जिले के गांव ढाणी के सरपंच मुकेश को दी गई है। रोटी बैंंक की देखरेख जींद के मुकेश कर रहे हैं। सुबह 9 बजे से रात 10 बजे तक इस रोटी बैंक में सेवाएं दी जाती हैं। मुकेश ने बताया कि एक बार वह हिसार अपनी पत्नी को दवा दिलवाने गए थे। उन्होंने वहां के रोटी बैंक में खाना खाया। इसके बाद उनके मन में भी इस नेक काम की मंशा जाग्रत हुई और इस सेवा में जुड़ गए और पानीपत रोटी बैंक की जिम्मेदारी ले ली।


 by
प्रदीप रेड़ू
सिटी तहलका

 

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