हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष अशोक तंवर का पार्टी से इस्‍तीफा, बोले- BJP सहित कई दलों से ऑफर

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हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष अशोक तंवर का पार्टी से इस्‍तीफा, बोले- BJP सहित कई दलों से ऑफर

 

Haryana Assembly Election 2019 में मुख्‍य चुनावी रण में अभी तक सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला माना जा रहा है, लेकिन इन दोनों दलों के बागियों की पसंद के कारण जेजेपी भी मुकाबले में दिख रही है। नामांकन के आखिरी दिन तक पूर्व सांसद दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी तिकोने मुकाबले में आकर खड़ी हो गई। इनेलो के दोफाड़ होने के बाद अस्तित्व में आई जननायक जनता पार्टी प्रदेश में भाजपा के असंतुष्ट और कांग्रेस के बागी नेताओं का आसरा बनी है। चुनाव लडऩे के इच्छुक भाजपा व कांग्रेस के जिन नेताओं को टिकट नहीं मिले, उन्हें दुष्यंत चौटाला ने गले लगाया है। नामांकन के आखिरी दौर में दूसरे दलों के कई नेताओं की जजपा में धड़ाधड़ एंट्री हुई है।

नामांकन के आखिरी दिन तक दूसरे दलों में सेंधमारी कर कई बड़े चेहरे जोड़े

जननायक जनता पार्टी का यह पहला विधानसभा चुनाव है। दुष्यंत चौटाला की पार्टी ने अपना पहला उपचुनाव जींद में लड़ा। यहां उनके छोटे भाई दिग्विजय चौटाला को चुनावी रण में उतारा गया। दिग्विजय ने कांग्रेस के कद्दावर नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला को पीछे धकेल दिया। हालांकि जीत यहां भाजपा के कृष्ण मिढा की हुई, लेकिन जजपा ने पूरी शिद्दत के साथ चुनाव लड़ा था। इसके बाद जजपा को आम आदमी पार्टी से मिलकर लोकसभा चुनाव लडऩे का मौका मिला। आप ने तीन और जजपा ने सात लोकसभा सीटों पर ताल ठोंकी। उम्मीद के मुताबिक नतीजे भले ही नहीं रहे, लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी पूरी तैयारी और रणनीति के साथ उतरी है।

पार्टी में टिकट वितरण को लेकर कार्यकर्ताओं और दूसरे दलों से आए लोगों को अहमियत

जननायक जनता पार्टी ने राज्य की सभी 90 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। हालांकि दुष्यंत चौटाला ने छह अलग-अलग किस्तों में पार्टी के उम्मीदवारों की घोषणा की, लेकिन यह उनकी रणनीति का एक पार्ट था। दूसरे दलों के असंतुष्ट नेता जजपा में शामिल होते गए और टिकट का ऐलान किया जाता रहा। कुछ नेता तो ऐसे जजपा में शामिल हुए, जो खुद चुनाव नहीं लड़े, मगर उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को राजनीति में स्थापित कर दिया और इसके लिए उन्हें जजपा का बैनर मिल गया है।

 

 

जननायक जनता पार्टी में हाल ही में पूर्व राज्यसभा सदस्य चौ. ईश्वर सिंह, पूर्व शिक्षा मंत्री मांगे राम गुप्ता, पूर्व राजस्व मंत्री सतपाल सांगवान, पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रण सिंह मान, पूर्व सीपीएस अनीता यादव, पूर्व विधायक सतविंद्र राणा, पूर्व विधायक शिव शंकर भारद्वाज और पूर्व विधायक रघुबीर छिल्लर की एंट्री हुई है। इसके बाद पार्टी के मैदान में होने का माहौल बनता नजर आने लगा। जो लोग जजपा में शामिल हुए हैं, वे कभी हुड्डा और चौटाला के संगी-साथियों में रहे हैं। कुछ लोग हाल ही में भाजपा में शामिल हुए थे, लेकिन उनका टिकट कट गया। ऐसे में उन्हें जजपा से उपयुक्त दूसरा प्लेटफार्म कोई नजर नहीं आया।

जजपा शाहाबाद में मात्र पौने छह सौ मतों से पराजित रामकरण काला, रणधीर मलिक और पवन खरखौदा समेत करीब दो दर्जन अन्य नेताओं को भी शामिल करने में कामयाब रही है। दुष्यंत चौटाला खुद उचाना हलके से चुनावी रण में हैं और उनकी माता नैना सिंह चौटाला ने इस बार डबवाली से बाहर आकर बाढड़ा को अपना रण क्षेत्र बनाया है। यहां उनका मुकाबला पूर्व सीएम बंसीलाल के बेटे व कांग्रेस प्रत्याशी रणबीर महेंद्रा के साथ होगा। उचाना में दुष्यंत चौटाला पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता से टक्कर लेते नजर आएंगे।

हुड्डा के साथियों को तोडऩे में रहे कामयाब

जजपा संयोजक दुष्यंत चौटाला ने चुनावी समीकरण साधते हुए अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की घोषणा में जातीय समीकरणों का भी खास ख्याल रखा है। दुष्यंत ने पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को दिल खोलकर टिकट बांटे। उन्होंने महिलाओं के साथ-साथ युवाओं की फौज को चुनावी रण में उतारने में खास रुचि दिखाई है। जाट वोट बैंक पर पकड़ रखने का दावा करने वाले हुड्डा के समर्थकों को तोडऩे में दुष्यंत चौटाला काफी हद तक कामयाब हुए हैं। अब यह कामयाबी चुनाव के दिन मतगणना तक कितनी बरकरार रहती है, यह देखने वाली बात होगी।

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दुष्यंत, नैना और दिग्विजय के सामने खुद को साबित करने की चुनौती

जजपा के प्रचार की कमान दुष्यंत के छोटे भाई दिग्विजय सिंह चौटाला पर रहेगी। सोनीपत लोकसभा और जींद उपचुनाव लड़ चुके दिग्विजय सिंह अब विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार करेंगे। उनके भाई और मां खुद चुनावी रण में हैं, इसलिए पार्टी की स्ट्रेटजी तैयार करने में उनकी अहम भूमिका रहने वाली है। पार्टी को हालांकि शिरोमणि अकाली दल के संयोजक व पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल का साथ नहीं मिला। बादल परिवार इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला व अभय सिंह के साथ खड़ा नजर आ रहा है। ऐसे में अब दुष्यंत, नैना और दिग्विजय पर खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती है।

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