CM मनोहरलाल का खास कदम, नई सरकार चलाने को पुरानी कैबिनेट संग करेंगे मंथन

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CM मनोहरलाल का खास कदम, नई सरकार चलाने को पुरानी कैबिनेट संग करेंगे मंथन

 

हरियाणा में भाजपा-जजपा गठबंधन की नई सरकार चलाने में पूर्व मंत्रियों की भी राय ली जाएगी। विधानसभा के विशेष सत्र से पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपनी पुरानी कैबिनेट के चुनाव हार चुके सभी मंत्रियों को बातचीत के लिए आज चंडीगढ़ बुलाया है। मनोहर लाल की पुरानी कैबिनेट में अनिल विज और डा. बनवारी लाल ही चुनाव जीते हैैं। इन दोनों को भी बैठक में आमंत्रित किया गया है।

मनोहर लाल ने हारे हुए सभी आठ मंत्रियों को अपने आवास पर बुलाया

सीएम निवास पर होने वाली इस बैठक में मुख्यमंत्री मनोहर लाल पुराने मंत्रियों के साथ नई सरकार के संचालन पर चर्चा करेंगे। मनोहर कैबिनेट में शामिल दो मंत्रियों विपुल गोयल और राव नरबीर को इस बार टिकट नहीं मिला था। इसलिए वह चुनाव नहीं लड़े, लेकिन विपुल व राव दोनों को बैठक में आमंत्रित किया गया है।

चुनाव जीते अनिल विज और डॉ. बनवारी लाल भी होंगे बैठक में शामिल

पुरानी मनोहर कैबिनेट के आठ मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा, कैप्टन अभिमन्यु, ओमप्रकाश धनखड़, कृष्ण पाल पंवार, कविता जैन, मनीष ग्रोवर, कृष्ण कुमार बेदी और कर्ण देव कांबोज चुनाव हार गए हैैं। इन आठों मंत्रियों को बैठक में बुलाया गया है। सीएम इस बैठक में पुराने मंत्रियों के साथ सरकार के संचालन, नए मंत्रियों की नियुक्ति, विधानसभा की कार्यवाही और भाजपा की सहयोगी पार्टी जजपा को कदम से कदम मिलाकर साथ लेकर चलने की तमाम स्थितियों पर चर्चा करेंगे।

 

 

बैठक में मंत्रियों के चुनाव हारने के कारणों की भी समीक्षा होगी। इंद्री हलके से 2014 में चुनाव जीते कर्ण देव कांबोज का इस बार हलका बदलकर रादौर किया गया है। रादौर से श्याम सिंह राणा विधायक थे। उनका टिकट काटा गया है। रादौर से कर्ण देव चुनाव हार गए, लेकिन दोनों एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैैं। इस तरह के मुद्दे भी सीएम के साथ होने वाली बैठक में उठाए जा सकते हैैं।

बैठक में मंत्री अपनी हार के कारण और भितरघात के साथ ही टिकट वितरण के तमाम पहलुओं पर खुलकर बातचीत करने वाले हैैं। दूसरी तरफ हरियाणा सचिवालय की पांचवीं मंजिल पर डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के नाम की प्लेट लग चुकी है। यह पूरा फ्लोर डिप्टी सीएम के आफिस के लिए आवंटित हो चुका है।

सीएम मनोहर लाल के नाम की प्लेट पहले ही लग चुकी है। मंत्रिमंडल का गठन छह नवंबर के बाद संभव है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में होने वाली नियुक्तियों पर भी चर्चा का दौर शुरू हो चुका है। इस बार सीएमओ पूरी तरह से बदला हुआ होगा।

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