यमुना को जहरीला करने में औद्योगिक इकाइयां बनीं कालिया नाग, अब फिर एक कान्हा की दरकार

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सिटी तहलका, पानीपत 31 मार्च. दो प्रदेशों के बीच से होकर बहने वाली यमुना का हाल आज बुरा हो चुका है. क्यों हो रही है यमुना मैली ? कौन कर रहा है दूषित ?, क्या कर रही है सरकार ? क्या कहना है यमुना किनारे बसे गांव के लोगों, पुजारियों और श्रदधालुओं का ?. संवाददाता प्रदीप रेढू ने यमुना में पहुंचकर वहां की ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की. पेश है रिपोर्ट के खास अंश….. यमुना में गंदगी का जमावडा है. जहां.तहां औद्योगिक इकाइयों का पानी सीधे यमुना में डाला जा रहा है. इससे यमुना दिन-प्रतिदिन विषैली हो रही है. यमुनानगर और पानीपत में तो यमुना के हालात कुछ ज्यादा ही खराब हैं. 15 साल पहले तक 12 महीने बहने वाली यमुना अब सिर्फ बरसात के सीजन में ही दो से तीन माह तक ही रौद्र रूप धारण करती है. उसके बाद 9 से 10 माह तक पूरी तरह सूखी रहती है. इस दौरान इसमें बहनी शुरू हो जाती है आसपास मौजूद औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले कैमिकल युक्त जहरीले पानी की धार. 10 माह में लोग खासकर औद्योगिक इकाइयांे के मालिक इसे पूरी तरह जहरीला बना देते हैं, यही नहीं, यमुना किनारे बसे हजारों गावों का मलयुक्त पानी भी इसमें गिराया जा रहा है. विडंवना ये है कि इसी पानी को साफ कर दिल्ली सरकार वहां के लोगों को सप्लाई करती है. इस बारे में यमुना पर मौजूद कुछ लोगों से बात की गई तो उनका कहना था कि यमुना एक पवित्र नदी है. करोडों लागों की जीवनदायिनी है. लाखों लोगों के लिए आस्था का केंद्र बिंदु है. आसपास के जंगलों में रहने वाले हजारों पशु-पक्षियों के लिए जीवन प्रदान करने वाली है, लेकिन अब सरकार की अनदेखी से अब यमुना के अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है. यमुना किनारे बसे गांवों और मंदिरों में रहने वाले साधु-संतों ने इसके अस्तित्व को बचाने के लिए सरकार को कुछ सुझाव भी दिए हैं. जैसे यमुना की सफाई के लिए घोषित हजारों करोड के बजट को यमुना की सफाई पर ही खर्च किया जाए. यमुना के आसपास मौजूद सभी औद्योगिक शहरों में औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले जहरीले पानी को यमुना में डालने से रोका जाए. कूडा-कचरा फेंकने वालों पर कार्रवाई की जाए; यमुना को स्वच्छ रखने के लिए समय≤ पर अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाए. उनका कहना है कि हर बार गंगा को स्वच्छ बनाने का वादा कर वोट लेने वाली भाजपा सरकार ने समय रहते इस ओर कदम नहीं उठाया तो इसका खामियाजा उसे आने वाले चुनावों में भुगतना पड सकता है.

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