आठ करोड़ स्ट्रीट लाइट घोटाले की एक और जांच, मंत्री विज तक पहुंची बात

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आठ करोड़ स्ट्रीट लाइट घोटाले की एक और जांच, मंत्री विज तक पहुंची बात

 

नगर निगम में आठ करोड़ के स्ट्रीट लाइट घोटाले में प्रदेश के निकाय मंत्री अनिल विज ने संज्ञान ले लिया है। जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। शहरी निकाय निदेशक कमेटी के अध्यक्ष होंगे। इंजीनियर इन चीफ और चीफ एकाउंटेंट को भी शामिल किया है। स्ट्रीट लाइट से संबंधित रिकॉर्ड तलब कर लिया गया है। इससे पहले शहरी विधायक प्रमोद विज भी निगम में भ्रष्टाचार की बात मान चुके हैं।

यह है मामला

स्ट्रीट लाइटों में नगर निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों ने आठ करोड़ का घोटाला किया। टावर लाइटों में कबाड़ी से पुराने पाइप खरीद पेंट करा लाइटें लगा दीं। लाइटों पर प्रसिद्ध कंपनियों के स्टीकर लगा दिए गए। अधिकारियों ने ठेकेदारों को मेंटेनेंस की पेमेंट भी कर दी। पार्षद दुष्यंत भट्ट के नेतृत्व में बनी जांच कमेटी ने तीन दिन पहले रिपोर्ट बैठक में रखी थी। इसमें मास्टरमाइंड जेई भूपेंद्र सिंह को बताया गया। कई अन्य अधिकारियों को भी मामले में शामिल बताया गया। स्टेट विजिलेंस से निर्धारित समय में जांच कराने और जेई, एमई, एक्सईएन कमिश्नर पर मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश की थी।

10 अगस्त की हाउस की बैठक में मांग उठी थी

1 अप्रैल 2018 से 10 अगस्त 2019 तक लगाई गई स्ट्रीट लाइटों और इनकी मेंटेनेंस की जांच की मांग 10 अगस्त की हाउस की मीटिंग में उठी थी। उसके बाद ही कमेटी गठित की गई थी।

इस तरह हुआ घोटाला

स्ट्रीट लाइटों के अलग-अलग राशि के बिल पास किए गए। 12.5 मीटर की एक टावर लाइट के एक जेई ने 2.25 लाख, दूसरे जेई ने 49300 और तीसरे जेई ने 2.50 लाख मेजरमेंट बुक में देते हुए दिखाए। इस तरह एक लाइट पर करीब दो लाख का अंतर आया। स्ट्रीट लाइट की जांच कमेटी ने गौतम इलेक्ट्रिकल वर्कर्स इंडस्ट्रियल एरिया से जांच कराई। कंपनी ने रिपोर्ट में बताया कि ज्यादातर लाइटें लोकल व घटिया क्वालिटी की लगी हैं। ब्रांडेड कंपनियों का लेवल लगाया गया है। 2237 स्ट्रीट लाइटों का बिल एक प्रसिद्ध कंपनी की अधिकृत एजेंसी का लगाया गया।

 

 

16 हजार लगा भुगतान 90 हजार का

स्ट्रीट लाइट के लिए जो पाइप लगाई उसकी कीमत 6 से 8 हजार रुपये है। इस पर 10 हजार की लाइटें लगी। जबकि बिल 90 हजार रुपये तक का पास किया गया। ब्रांडेड कंपनियों की स्ट्रीट लाइट 1300 से 1600 रुपये में आती है। कंपनी में 4000 से 4200 का भुगतान किया गया। कंपनी की स्ट्रीटलाइट में अर्थिंग के लिए सर्किट होता है वह इनमें नहीं है।

पेमेंट किसी को टेंडर किसी का

जांच समिति के अध्यक्ष पार्षद दुष्यंत भट्ट ने बताया कि निगम में चार-पांच फर्मों के नाम पर वर्क आर्डर लिए जाते हैं, जबकि काम दो या तीन व्यक्ति ही कर रहे हैं। एक फर्म 10 लाख तक का काम ले सकती है। अधिकारियों ने उसे 50 लाख से करोड़ों तक के काम दिए।

सामाजिक संगठन भी कूदे मैदान में

भारतीय क्रांतिकारी सेना ने उप पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि जनता के टैक्स के जमा रुपये से विकास के नाम पर नगर निगम द्वारा लाइट लगाने में किए गए घोटाले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज कराया जाए। घोटाले में शामिल अधिकारियों से घोटाले की राशि ली जाए। ज्ञापन देने वालों में कुलजीत सिंह, प्रदीप, हिम्मत सोनी व राजेश शामिल रहे।

यहां लगी डुप्लीकेट लाइटें
बतरा कॉलोनी में आठ लाइटें
ग्रोवर चौक के नजदीक चार लाइटें और पोल
राम मेडिकल स्टोर के नजदीक चार लाइटें और खंभे
शुगर मिल कॉलोनी के शनि मंदिर के पास लगी लाइटें
आठ मरला मंदिर पीछे पार्क में लगी लाइटें
मॉडल टाउन में लगी लाइटें
ईदगाह रोड पर पुराने पाइपों के जुगाड़ पर लाइटें लगा दी।
पार्कों में ज्यादा स्ट्रीट लाइटें लगी।
पुरानी लाइटें कहां गई
कमेटी गठित करने की जानकारी मिली है। स्ट्रीट लाइट का रिकार्ड निदेशालय भेजा जाएगा।

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